कभी कभी किसी को ज़िन्दगी से अलग करना बहुत मुश्किल होता है। और उससे भी मुश्किल होता है उसकी यादो से अलग होना, उन बातो से अलग होना जो अनजाने में ख़ुद ही की ज़िन्दगी का एक हिस्सा बन गई थी। आज की और बीते हुए कल की ज़िन्दगी को ये 'मगर' ही तो अलग करता है। :)
आज भी आँखों को बस तेरी ही तलाश है
रोकते हैं फ़िर भी शायद दिल में बची एक आस है
जिंदा हैं क्योंकि साथ अभी भी साँस है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
आँख खुलते ही आज भी तेरा चेहरा नज़र आता है
अब भी मेरी दुआ में तेरा नाम पहले आता है
रात के चाँद में तू अब भी उतर आता है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
आज भी तेरी खुशियाँ मेरी ज़िन्दगी का मुकाम हैं
आंसू हों तेरी आँखों में, मेरी ज़िन्दगी की वो शाम है
आईने में दीखता वो अक्स आज जाने क्यों बेनाम है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
भ्रम से अब जब निकले हैं सच को आज जाना है
वो रिश्ता और उस रिश्ते का हर सच कितना बेमाना है
जहाँ थे ही नही आज ख़ुद को वहां से हटाना है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
आज भी आँखों को बस तेरी ही तलाश है
रोकते हैं फ़िर भी शायद दिल में बची एक आस है
जिंदा हैं क्योंकि साथ अभी भी साँस है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
आँख खुलते ही आज भी तेरा चेहरा नज़र आता है
अब भी मेरी दुआ में तेरा नाम पहले आता है
रात के चाँद में तू अब भी उतर आता है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
आज भी तेरी खुशियाँ मेरी ज़िन्दगी का मुकाम हैं
आंसू हों तेरी आँखों में, मेरी ज़िन्दगी की वो शाम है
आईने में दीखता वो अक्स आज जाने क्यों बेनाम है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
भ्रम से अब जब निकले हैं सच को आज जाना है
वो रिश्ता और उस रिश्ते का हर सच कितना बेमाना है
जहाँ थे ही नही आज ख़ुद को वहां से हटाना है
मगर अब तेरी मेरी बात नही होती॥
4 comments:
excellent poem, reminded me of few lines I read long before
मासूम मौहब्बत का बस इतना फ़साना है।
कगज़ कि कश्ती है और बारिश का ज़मना है।
उस पार उतरने की उम्मींद बहुत ही कम है,
कश्ती भी पुरानी है और तूफ़ान को भी आना है।
आज फिर कोई इश्क की ज़िद पे है।
फिर तो आग का दरिया है और डूब के जाना है।
hey shilpi............kya hua yaa....itna sento poem...or wo bhi shilpi....how come? kya ye wo ho shilpi hai? is it?
jhooti :)
bahut hi acchha hai jo bhi likha hai . dil ke kafi kareeb hai. keep it up
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